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गांधी सागर जलाशय में अवैध मत्स्याखेट का खेल! पश्चिम बंगाल के मछुआरों से रोजाना करोड़ों का कारोबार, विभागीय मिलीभगत के आरोप....

नीमच/मंदसौर। विशेष प्रतिनिधि।
गांधी सागर जलाशय में मत्स्याखेट को लेकर पहले से ही विवाद और बेरोजगारी का संकट गहराता जा रहा है। एक ओर हजारों स्थानीय मछुआरे रोजगार के अभाव में परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर जलाशय और चंबल नदी के बैकवाटर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध मत्स्याखेट जारी होने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि मत्स्य विकास निगम के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों, मत्स्य सहकारी समितियों के प्रभावशाली पदाधिकारियों तथा राजनीतिक संरक्षण के चलते यह पूरा खेल संचालित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार गांधी सागर जलाशय के बैकवाटर क्षेत्र कवला, गोलंब नाला, बसई एवं चंबल नदी के कई हिस्सों में अवैध रूप से मछली पकड़ने का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। आरोप है कि स्थानीय मछुआरों को रोजगार से वंचित कर पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में मछुआरों को लाया गया है, जो नियमों को दरकिनार कर मत्स्याखेट कर रहे हैं।

भाजपा नेता के संरक्षण में 500 नावों का संचालन!....

सूत्रों के मुताबिक एक मत्स्य सहकारी संस्था से जुड़े भाजपा नेता द्वारा नदी क्षेत्र में लगभग 500 नावों का ठेका लिया गया है। आरोप है कि इन्हीं नावों के माध्यम से अवैध मत्स्याखेट का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन क्षेत्र में इसकी चर्चा जोरों पर है।

"विश्वास जी के भरोसे चल रहा काम"......

नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक मछुआरे ने बताया कि वह और उसके साथी "विश्वास जी" के भरोसे अवैध रूप से मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। मछुआरे का दावा है कि प्रत्येक नाव से प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये लिए जाते हैं और यह राशि विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही जाती है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पूरे नेटवर्क को संरक्षण प्राप्त है, इसलिए कार्रवाई का भय नहीं है।

रोज 25 से 30 टन मछली बाहर भेजे जाने का दावा.....

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांधी सागर क्षेत्र से प्रतिदिन 25 से 30 टन मछली अवैध रूप से पकड़ी जा रही है और इसे ट्रकों के माध्यम से कोटा, दिल्ली सहित अन्य बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। यदि यह दावा सही है तो इससे शासन को भारी राजस्व हानि होने के साथ-साथ जलाशय की मत्स्य संपदा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय मछुआरों में रोष....

स्थानीय मछुआरा समुदाय का कहना है कि एक तरफ उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ बाहरी लोगों को संरक्षण देकर अवैध कारोबार कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गांधी सागर जलाशय की मत्स्य संपदा को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

जांच और कार्रवाई की मांग....

क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं मछुआरों ने जिला प्रशासन, मत्स्य विभाग तथा मध्यप्रदेश सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मांग की जा रही है कि आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों एवं संरक्षण देने वाले तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा उन्हें तत्काल पदस्थापना स्थल से हटाया जाए, ताकि शासन के राजस्व की रक्षा हो सके और जलाशय में पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की जा सके।

महासंघ का पक्ष: 4000 हेक्टेयर जलाशय पर लगातार निगरानी, अवैध मत्स्याखेट रोकने के लिए भेजा प्रस्ताव....

मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ के क्षेत्रीय प्रबंधक महेंद्र उईके ने अवैध मत्स्याखेट के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गांधी सागर जलाशय लगभग 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसके विभिन्न हिस्सों में महासंघ द्वारा नियमित रूप से रेंडम जांच और निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी अवैध मत्स्याखेट के मामलों में कार्रवाई की गई है और आगे भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे। उईके के अनुसार जांच के दौरान अधिकांश मामलों में स्थानीय समितियों एवं स्थानीय मछुआरों की संलिप्तता सामने आई है। उन्होंने बाहरी मछुआरों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध मत्स्याखेट किए जाने की बात को निराधार बताते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा होना संभव नहीं है। क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि जलाशय में निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महासंघ द्वारा शासन को विशेष प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद जलाशय क्षेत्र में विशेष कैंप स्थापित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से पूरे जलाशय पर सतत निगरानी रखी जाएगी तथा अवैध मत्स्याखेट और अन्य अनियमित गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महासंघ जल संसाधनों के संरक्षण और मत्स्य संपदा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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