कांग्रेस का मंथन जारी, चुनाव पड़ सकता है भारी! मीनाक्षी के लिए राज्यसभा की राह आसान नहीं, क्या होगा सियासी सेंधमारी का खेल...?
भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव ने अचानक रोमांचक मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में अपने दो उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के बाद भी भाजपा के पास पर्याप्त अतिरिक्त वोट मौजूद हैं, जिससे कांग्रेस की एकमात्र सीट पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए करीब 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा के संपर्क में हो सकते हैं। इसी आशंका ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है और पार्टी अब अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है! राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन दाखिल करने के बाद कांग्रेस ने तुरंत अपने सभी विधायकों को भोपाल में एकत्रित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधायकों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर मंथन किया। दिनभर चली बैठकों और चर्चाओं के बाद पार्टी ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। पहले कांग्रेस विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजने की चर्चा थी, लेकिन अब उन्हें कर्नाटक स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। सूत्रों के अनुसार सभी विधायक विशेष विमान से बेंगलुरु रवाना होंगे और मतदान तक वहीं रहेंगे। यह कदम संभावित क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ की आशंकाओं को देखते हुए उठाया जा रहा है। राजनीतिक रणनीति के तहत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने निवास पर सभी विधायकों को रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान राज्यसभा चुनाव को लेकर गहन चर्चा हुई और पार्टी की एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया गया। सिंघार ने दावा किया कि कांग्रेस विधायक दल पूरी तरह एकजुट है और मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी विधायक प्रतिबद्ध हैं। हालांकि भाजपा की आक्रामक रणनीति ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा के मौजूदा अंकगणित में जहां कांग्रेस की जीत संभव दिखाई देती है, वहीं यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस का पूरा फोकस अपने विधायकों को एकजुट रखने पर है। अब सबकी निगाहें 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी एकजुटता बनाए रख पाएगी या भाजपा की सियासी बिसात पर कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा? मीनाक्षी नटराजन की जीत का दावा मजबूत जरूर है, लेकिन भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की एंट्री ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।