तबादलों की आंधी पर लगा ब्रेक, 16 जून की आधी रात तक हुए हजारों ट्रांसफर, अब एक साल तक सीएम की मंजूरी के बिना नहीं होगा स्थानांतरण.....
भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से तबादलों का दौर अपने चरम पर रहा। 16 जून की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए। मंगलवार को दोपहर से लेकर रात 12 बजे तक तबादलों की प्रक्रिया इतनी तेज रही कि कुछ ही घंटों में हजारों कर्मचारियों के तबादला आदेश जारी कर दिए गए। जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित कई विभागों में व्यापक स्तर पर तबादले हुए। शासन द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि के चलते विभागीय अधिकारियों ने लंबित प्रस्तावों का तेजी से निराकरण करते हुए बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पदस्थ किया। सूत्रों के अनुसार अंतिम दिन प्रदेशभर में लगभग पांच हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए गए। कई विभागों में देर रात तक आदेश जारी करने का सिलसिला चलता रहा। तबादला अवधि समाप्त होने के बाद अब प्रदेश में सामान्य स्थानांतरण पर रोक प्रभावी हो गई है।
अब एक साल तक सख्त नियम लागू.....
राज्य शासन की तबादला नीति के अनुसार 16 जून की रात 12 बजे के बाद सामान्य तबादलों पर रोक लग गई है। इसका मतलब यह है कि अब आगामी एक वर्ष तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं किया जा सकेगा।
मंत्री भी नहीं करा सकेंगे सीधे तबादले.....
तबादला अवधि समाप्त होने के बाद अब किसी अधिकारी या कर्मचारी के स्थानांतरण के लिए विशेष अनुमति आवश्यक होगी। यदि किसी प्रशासनिक आवश्यकता या विशेष परिस्थिति में तबादला करना जरूरी होता है, तो संबंधित विभाग को प्रस्ताव तैयार कर शासन स्तर पर भेजना होगा।
मुख्यमंत्री की मंजूरी होगी अनिवार्य....
नए नियमों के तहत आगामी एक वर्ष में होने वाले स्थानांतरण मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बिना संभव नहीं होंगे। संबंधित मंत्री या विभागीय स्तर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने पर ही लिया जा सकेगा। ऐसे में अब विधायक, सांसद या मंत्री की सिफारिश मात्र से तबादला कराना आसान नहीं रहेगा।
अंतिम दिन दिखी सबसे ज्यादा सक्रियता.....
तबादला नीति की समय सीमा समाप्त होने से पहले विभागीय कार्यालयों में असाधारण सक्रियता देखने को मिली। अधिकारियों ने लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया और बड़ी संख्या में आदेश जारी किए। कई विभागों में देर रात तक फाइलों की प्रक्रिया चलती रही, जिसके बाद आधी रात के साथ तबादलों का यह दौर थम गया। अब प्रदेश के हजारों अधिकारी और कर्मचारी अपने नए पदस्थापन स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने की तैयारी में जुट गए हैं, जबकि स्थानांतरण चाहने वालों को अगले आदेश या विशेष अनुमति का इंतजार करना होगा।