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डीपी ज्वेलर्स का घिनौना कृत्य...उपभोक्ताओं को लुभाने, पवित्र ग्रंथ की चौपाइयों से छेड़छाड़....निजी स्वार्थों को साधने, धर्म के खिलाफ जाकर सनातनियों की आस्था से किया खिलवाड़....सोना-चांदी बेचने वाले डीपी के संचालकों की करतूतों पर भड़की विरोध की चिंगारी....

नीमच//अपनी दुकानदारी को सजाने...जमाने...उपभोक्ताओं लुभाने...और उनके बीच पहचान बनाने लिए व्यापारियों को तरह-तरह के प्रचार-प्रसार के तरीके अपनाते हुए तो हम सभी ने देखा है...लेकिन क्या आपने कभी सुना है, की किसी दुकानदार ने अपने व्यवसाय में चार चांद लगाने उसे आकर्षण बनाने और ग्राहकों को लुभाने के लिए सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ किया हो...शायद नहीं... और ऐसा संभव भी नहीं की अपने फायदे के लिए कोई भी व्यवसायी अपनी संस्कृति को भूलकर धर्म का अपमान करें...और समाज के विरोध, आक्रोश और उसकी नाराजगी से दौ चार होना पड़े...! लेकिन क्या कहेंगे जब देश भर में ख्याति प्राप्त कारोबारियों के द्वारा इस प्रकार का घिनौना कृत्य किया जाए...और अपनी दुकानदारी में उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने पर उतारू हो जाए...मामला चौंकाने वाला है, और प्रसिद्ध आभूषण कारोबारी डीपी ज्वेलर्स से संबंध रखता है... जिसकी करतूतों से जाहिर हो गया कि, कारोबार में फायदे के लिए कुछ लोग धर्म को हानि पहुंचाने और उसका अपमान करने से भी परहेज नहीं करते...फिर चाहे किसी की आस्था को ठेस पहुंचे या कोई विरोध जताए... दौलत के दम पर शानो, शौकत का दंभ पाले डीपी ज्वेलर्स के संचालकों को कोई फर्क नहीं पड़ता है...
मामला दरहसल आभूषण कारोबारी डीपी ज्वेलर्स के संचालकों द्वारा दशहरे पर जारी एक विज्ञापन से जुड़ा है...जिसके जारी होते ही एक बवंडर सा मच गया और सोना-चांदी बेचने वाले डीपी ज्वेलर्स की कड़ी आलोचनाएं चौक चौराहों से लेकर शहर-शहर होने लगी...आभूषण कारोबार के क्षेत्र में डीपी के बढ़ते कद ने उसकी मर्यादा को भी भुला दिया...धर्म की व्याख्या ही बदल दी...और पवित्र ग्रंथ में अंकित चौपाइयों के साथ खिलवाड़ कर दिया...जी हां रामायण से संबंधित पवित्र ग्रंथ श्री रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित चौपाइयों में से एक

"रघुकुल रीत सदा चली आई"
"प्राण जाहु बरु वचन न जाए"

उक्त चौपाई को अपने निजी स्वार्थ के लिए डीपी ज्वेलर्स के संचालकों ने धर्म के खिलाफ जाते हुए, करोड़ों सनातनियों की आस्था से खिलवाड़ करते हुए, बदलकर ही रख दिया...और इसकी जगह डीपी ज्वेलर्स द्वारा जारी विज्ञापन में दर्शाया की...

"रघुकुल रीत सदा चली आई"
"स्वर्ण से हमेशा सुख समृद्धि घर आई"...?

इसे चूक नहीं...बल्कि अपने फायदे के लिए जानबूझकर सनातन धर्म के साथ किया गया खिलवाड़ कहा जाता है...जिसे डीपी ज्वेलर्स के मालिकों ने दौलत और अपनी प्रसिद्धि के नशे में चूर होकर प्रचारित किया...!

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