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पर्दे के पीछे से चल रहे कथित शिकायतों के हथियार,पहले "धनराज चौधरी" तो अब "जैनब बोहरा" बनी मोहरा_.. "अशोक अरोरा" के खिलाफ रचे गए षडयंत्र के दो किरदार और हकीकत ने दोनों को किया बे-नकाब....

नीमच//बीते कुछ दिनों से सार्वजनिक तौर पर देखने में आ रहा है कि मालवा-मेवाड़ के प्रतिष्ठित समाज सेवी अशोक अरोरा को लेकर तरह-तरह के आरोप-प्रत्यारोपों से जुड़ी एक परिपाटी सी चल पड़ी है, और किसी न किसी माध्यम के जरिए समाज सेवी अशोक अरोरा की प्रसिद्धि और उनके व्यक्तित्व को आघात पहुंचाने की साजिशों पर काम किया जा रहा है...जहां षड़यंत्रों से लबरेज इन कहानियों के असल निर्माता पर्दे के पीछे छिपे है...लेकिन वहीं अशोक अरोरा के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले साजिशों के किरदार तोते की तरह हो गए है, जो समाज सेवी अरोरा के खिलाफ अपने आकाओं के मुताबिक तैयार की गई साजिशों की कहानी तो सुनाते है, लेकिन अंततः हथियारों के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले इन किरदारों का चेहरा भी बे-नकाब हो ही जाता है, जहां कभी धनराज लाला चौधरी को मुंह की खानी पड़ रही है,,,तो कभी जैनब बोहरा का दांव उल्टा पड़ रहा है...लिहाजा अब मानवता के खिलाफ रची जा रही इन साजिशों को अंजाम देने वाले उन अराजक तत्वों के चेहरे से पर्दा उठाना भी प्रशासन के लिए चुनौती सा बन गया है, जो शहर की फिजा को बिगाड़ने पर तुले है, और किसी खौफनाक साजिश को अंजाम देने की नियत से पर्दे के पीछे रहकर नापाक मंसूबों को अंजाम देना चाहते है...?
बहरहाल समाज सेवी अशोक अरोरा के खिलाफ साजिशकर्ताओं की और से चलाया गया एक नया हथियार जैनब बोहरा के रूप में सामने आया है, जिसका ताल्लुख एक सभ्य समाज से तो है, लेकिन असामाजिक ताकतों के इशारों पर काम करते हुए, इसने भी तोते की तरह रटी रटाई स्क्रिप्ट पढ़ डाली और अंततः हकीकत कुछ इस तरह सामने आई कि, सभ्य समाज से जुड़ी महिला की करतूतों का ही ठीकरा फुट गया...जिसने खुद फर्जीवाड़े की व्यूह रचना रचते हुए, भूखंड बेचने के नाम पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया...जिसकी शिकायत बकायदा फरियादी की और से स्थानीय कैंट थाने में की गई है...

बीते एक माह में यह तीसरी मर्तबा है, जब समाज सेवी अशोक अरोरा के खिलाफ साजिशें किसी किसी न रूप में निकलकर बाहर आई है...जहां विरोधियों द्वारा चलाए गए हथियार और उसके किरदार तो अपने मकसदों में नाकाम होकर उल्टे पांव लौट गए...लेकिन इन साजिशों के पीछे पनप रहा मंसूबा किस हद तक जा सकता है, इस पर सरकारी एजेंसियों को गहनता से विचार करने और गंभीर होने की आवश्यकता है...मालवा-मेवाड़ में अपने सामाजिक और धार्मिक सेवा कार्यों के चलते प्रसिद्धि हासिल करने वाले समाज सेवी अशोक अरोरा को लेकर निर्मित किया जा रहा वातावरण किसी गहरी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है...इस बात से इनकार नहीं किया सकता...?

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