सरकारें बनाने में अहमियत रखने वाला कुशाग्र बुद्धि का धनी "व्यापारी" अपनी सरकार बनाने में नहीं कर सकता चूक...! कयासों और अंदाजे के अनुमान से भी ऊपर उठकर होगा व्यापारी संघ का चुनावी संग्राम....हाइवोल्टेज मुद्दा- रस्सी समझकर सांप पकड़ने की नहीं होगी भूल अन्यथा लोकतांत्रिक तरीके से डसे जाएंगे......?
नीमच कृषि उपज मंडी, कहने को ये महज किसानों की फसलों को बेचने एक व्यापारिक केंद्र है, जहां विभिन्न प्रकार की जींसों का कारोबार हर दिन होता है...जितनी मेहनत से किसान अपनी फसलों को तैयार कर नीमच की इस आदर्श मंडी तक लेकर आता है, उतना ही मेहनतकश यहां का व्यापारी भी है, जो सुबह से लेकर देर शाम तक किसानों को उसकी उपज का उचित लाभ देकर मंडी की इस कारोबारी गतिविधि में अपना योगदान देता है... लेकिन नीमच मंडी में व्यापारियों की यह भागम भाग केवल उनकी कारोबारी गतिविधियों तक सीमित नहीं है...यहां उनका अपना एक राजनैतिक दृष्टिकोण भी है, जो नगर सरकार से लेकर प्रदेश और देश की सरकार बनने तक अपना अहम योगदान देती आई है...
लेकिन आज चुनाव इनकी अपनी सरकार का है, जिसके लिए नीमच कृषि उपज मंडी चुनावी रण भूमि में तब्दील हो चुकी है...आगामी 04 जनवरी को यहां अध्यक्ष पद सहित प्रबंधन कार्यकारिणी को लेकर चुनाव होना है, और उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों के साथ इस चुनावी रण में फतेह हासिल करने की मैदानी रणनीति भी तैयार कर ली है, चुनाव का सबसे हाइवोल्टेज टकराव अध्यक्ष के दो उम्मीदवारों के बीच है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है, और मतदान से पहले परिणामों का आंकलन लगाया जा चुका है... हालांकि प्रतिष्ठित, प्रभावी, और संभ्रांत होने के साथ ही एक मजबूत व्यापारिक संगठन से जुड़ा नीमच कृषि उपज मंडी का व्यापारी भलीभांति इस बात को भी समझता है कि, उनका नेतृत्व आखिर किन हाथों में जाना चाहिए...एक वो जिसने दो दशकों से मंडी व्यापारी संघ को अपनी निजी संपत्ति समझकर अपना एकाधिकार जमाए रखा...जिसके कुनबे से "रस्सी समझकर सांप न पकड़ने" की धौंस आती है...बाजारों में सरेराह सड़क छाप गुंडई दिखाई जाती है...और गरीब मजलूमों की जमीनों को हड़प करने जैसे कृत्यों को शान से अंजाम दिया जाता है....अनगिनत ऐसे कारनामे अब तक सामने आ चुके है, जिनकी गूंज पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में गूंजती आई है.....?
वहीं दूसरी और सामाजिक सरोकार से जुड़ा वो चेहरा है, जो साधारण होकर भी खास माना जाता है, व्यापारियों से जुड़ी समस्याओं को करीब से जानता और समझता है, जहां पद की कोई लालसा नहीं लेकिन अपने व्यापारी भाइयों के अधिकारों के लिए लड़ने का मादा रखता है, और इसके लिए आवश्यकता एक मंच की होती है, जो व्यापारी संघ का नेतृत्व करने से ही मिलता है.....
बहरहाल नीमच कृषि उपज मंडी में व्यापारी का संघ का यह चुनाव कयासों और अंदाजे के अनुमान से भले ही टक्कर का हो या एक तरफा लेकिन यहां व्यापारियों की कुशाग्र बुद्धि का भी कुछ कहा नहीं जा सकता, जो स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सरकारें बनाने में अपनी छोटी सी ही सही अहमियत तो रखते है, ऐसे में जाहिर है कि अपनी सरकार बनाने में व्यापारी कही कोई चूक कर ही नहीं सकता.... वो जानता है कि अब रस्सी समझकर सांप नहीं पकड़ना है, अन्यथा लोकतांत्रिक तरीके से डसे जाएंगे.....!