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पर्दे के पीछे रहकर शहर में अराजकता फैलाने वाले से कहीं बेहतर खरी-खोटी कहने वाला....व्यापारी संघ अध्यक्ष पद के दोनों दावेदारों को लेकर, चर्चाओं के बाजार में उठे गंभीर सवाल.....व्यापारी संघ की सरकार चुनने वाले मतदाताओं की आत्मा से निकली आवाज, हकीकत कर रही बयां.....मंडी के चुनावी रण में व्यापारियों का विश्वसनीय चेहरा बनकर उभर रहे, "गोपाल जीजी".....

नीमच//कल होने वाले कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ चुनावों को लेकर अध्यक्ष पद के दावेदारों के बीच अब तक कश्मकश और कयासों का दौर चलता रहा, पिछले कुछ दिनों से दोनों ही दावेदारों की और से अपने-अपने स्तर पर चुनावी रण में खुद को बेहतर साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई...आरोप-प्रत्यारोप और प्रतिक्रियाओं के बीच व्यापारी का संघ का चुनावी प्रचार वैचारिक तौर पर जंग का मैदान बन गया...लेकिन इस बीच बीस सालों बाद अपने मतों का उपयोग कर मंडी व्यापारी संघ की सरकार चुनने वाले व्यापारियों की आत्मा से जो आवाज निकलकर आई है, उसने आखिरकार उस हकीकत को बंया कर ही दिया जो, नजर तो आ रही थी, लेकिन बखान कोई करना नहीं चाहता...ऐसे में मंडी व्यापारी संघ चुनावों से जुड़ी बाजारों की चौक चर्चाएं गंभीरता से उन सवालों को भी खड़ा कर रही है, जो चुनावों के मद्देनजर काफी अहम है...और पर उस लगभग सभी व्यापारियों को अपने विवेक से अमल भी करना चाहिए...ताकि उनका एक मत नीमच कृषि उपज मंडी में व्यापारी संघ अध्यक्ष के रूप में एक सही नेतृत्व का चयन कर सकें...!
इस बात का इल्म तो व्यापारी संघ चुनावों में सहभागिता निभाने वाले हर उस व्यापारी को होना चाहिए कि, पर्दे के पीछे रहकर शहर में अराजकता और गुंडई फैलाने वालों को बढ़वा देने वालों से कहीं बेहतर एक ऐसा चेहरा भी जो भले ही "मुंह-फट" हो पर बोले खरी-खरी सही को सही और गलत को गलत बोलने का जिसमें मादा हो... व्यापारियों को जिससे आतंकित होने का डर नहीं बल्कि सुरक्षित तौर पर अपना कारोबार करने का गर्व हो...
वैसे नीमच कृषि उपज मंडी के प्रतिष्ठित व्यापारी से लेकर शहर का हर एक बाशिंदा इस बात से भी भलीभांति परिचित है, की शहर की सड़कों पर किसने कितना आतंक मचाया गया, कैसे खुलेआम एक दुकानदार के साथ रंगदारी दिखाई गई...गरीबों की जमीनों को हथियाने का षडयंत्र और असहाय किसानों के साथ मारपीट जैसे मामले आए दिन पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में देखने को मिल रहे है...और ये सब किसकी सरपरस्ती में हो रहा है, यह बताने की आवश्यकता नहीं...?
ऐसे में सत्ता और संगठन के दम पर एक आम शहरी और गरीब किसानों को आतंकित करने वाले चेहरों को मंडी के साफ-सुथरे कारोबारी परिवेश से दूर रखने की जरूरत है, ताकि निकट भविष्य में नीमच की आदर्श मंडी रंगदारी दिखाने वालों का अखाड़ा न बनकर रह जाए...!

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