ये कैसी तानाशाही- विधायक के खिलाफ छापी खबर तो, पत्रकार पर हो रही जिलाबदर की कार्यवाही....सात दिन में विधायक को मिली आदिवासी की जमीन... पत्रकार ने उठाया मुद्दा तो सात दिन में ही फैल गई अराजकता...? पत्रकार मूलचंद खींची ने वीडियो जारी कर बताई पीड़ा, विधायक परिहार व उज्जैन रेंज एडीजी राकेश गुप्ता को ठहराया जिम्मेदार...?
नीमच//सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों के कारनामों के खिलाफ आवाज उठाना एक पत्रकार को इतना प्रताड़ित कर गया कि, वह आत्महत्या करने जैसा खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर हो गया...पत्रकार द्वारा बकायदा इसका वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर जारी किया है, जिसमें उसने आप बीती सुनाते हुए, आत्महत्या जैसा कदम उठाने की बात कही है, और इसका जिम्मेदार विधायक सहित मध्यप्रदेश के एक शीर्ष अधिकारी को ठहराया है...मामला दरहसल मध्यप्रदेश के नीमच जिले का है, जहां के स्थानीय विधायक दिलीप सिंह परिहार के खिलाफ समाचार प्रकाशित करना पत्रकार पर भारी पड़ गया... विधायक द्वारा अपने पॉवर का दुरुपयोग करते हुए, पत्रकार के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही करने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया और स्थानीय पुलिस ने इसकी पूरी प्रोसेसिंग भी तैयार कर डाली... मामले में कार्यवाही करते हुए स्थानीय नीमच सिटी थाना पुलिस ने दलबल के साथ पत्रकार मूलचंद खींची के फव्वारा चौक स्थित ऑफिस पर दबिश दी और उनसे जबरन नोटिस तमिल करने को कहा गया...
बतादे की इस कार्यवाही के करीब सात दिवस पूर्व ही पत्रकार मूलचंद खींची द्वारा नियम विरुद्ध आदिवासी की जमीन परिजनों के नाम करवा वहां पेट्रोल पंप संचालित करने के संबंध में विधायक दिलीप सिंह परिहार के खिलाफ एक समाचार प्रकाशित किया था...जिसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की और से पत्रकार के खिलाफ जिला बदर जैसी उक्त कार्यवाही सामने आई...
पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो पत्रकार मूलचंद खींची ने स्वयं जारी किया है... जिसका उल्लेख इस प्रकार है...
मैं मूलचंद खींची, बीते पंद्रह सालों से नीमच मध्यप्रदेश में सक्रिय पत्रकारिकता कर रहा हूं। इस दौरान मैंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया सहित स्थानीय अखबारों में सेवाएं दी और वर्ष 2015 से खुद का चैनल दशपुर लाइव का नीमच में संचालन कर रहा हूं। मैरी पत्रकारिता के जीवन में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जिसमें एक विधायक के दबाव में आकर पुलिस प्रशासन द्वारा जिलाबदर किया जा रहा है, मैरा साथ देने वाला कोई नहीं है, मैंने उज्जैन रेंज के एडीजी राकेश कुमार गुप्ता, रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल के समक्ष मदद की गुहार लगाई और बताया गया कि मुझे नीमच के विधायक दिलीपसिंह परिहार के इशारे पर जिला बदर किया जा रहा है, मैरे छोटे—छोटे बच्चें है।
मैरे द्वारा नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार के खिलाफ खबर प्रकाशित की, बस इतना सा मैरा कसूर है, महू—नीमच हाईवे पर नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार ने आदिवासी की जमीन पर पेट्रोल पंप बना दिया। आदिवासी लालूराम और प्रेमाबाई की भूमि पर पेट्रोल पंप खोला और मात्र सात दिन में इसकी अनुमति कलेक्टर नीमच द्वारा जारी कर दी। 14 दिसंबर 2020 को नीमच के विधायक के बेटे यशराज और बेटी हर्षला के नाम से एग्रीमेंट होता है और मात्र 7 दिन में 22 दिसंबर 2020 को तहसीलदार ओके रिपोर्ट भेज देते है और 23 दिसंबर 2020 को कलेक्टर द्वारा अनुमति जारी कर दी जाती है। इस संबंध में मैने मुख्यमंत्री महोदय, लोकायुक्त सहित अन्य विभागो में शिकायत की और दिनांक 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को खबर प्रकाशित की।
नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार के पेट्रोल पंप की जांच तो नहीं होती है, उल्टा मुझे ही जिलाबदर करने की कार्रवाई शुरू हो जाती है, दिनांक 6 मार्च 2026 को मुझे नीमच जिलाधीश महोदय का नोटिस मिलता है, नोटिस नीमच सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान बल के साथ मैरे आफिस में दिनांक 7 मार्च 2026 को देने आती है, तब मैरे पैरो तले जमीन खिसक गई, आखिर मैंने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया, जिसे पुलिस अचानक मुझे जिलाबदर कर रही है।
मैं थक हार गया हूं, मैंने कई जगह पर गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई मैरी नहीं हो रही है। आत्महत्या करने के अलावा मैरे पास कोई विकल्प नहीं है। मैं आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया हूं। अगर मैं आत्महत्या करता हूं, कहीं पर भी मैरी लाश मिल सकती है। इसके जिम्मेदार नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार, उज्जैन रेंज के एडीडी राकेश कुमार गुप्ता ही रहेंगे। मैंरी मौत के जिम्मेदार एक तीसरा अधिकारी भी है, रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल। सिर्फ मैरी मौत के जिम्मेदार इन्हें ही माना जाएगा, इनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, क्योंकि गलत काम की आवाज उठाने पर एक पत्रकार को प्रताडित इनके द्वारा ही प्रताडित किया गया है।