दो दिवसीय दौरे पर डीआईजी निमिष अग्रवाल, अपराध नियंत्रण और नशा मुक्ति अभियान की ली समीक्षा, नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति, डीआईजी ने दिए सख्त निर्देश.....
नीमच// रतलाम रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) निमिष अग्रवाल का दो दिवसीय नीमच दौरा जिले की पुलिस व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान उन्होंने जिला पुलिस कार्यालय सहित विभिन्न थानों का वार्षिक निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने,फरार अपराधियों की गिरफ्तारी,मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर कार्रवाई और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
डीआईजी निमिष अग्रवाल ने बताया कि वार्षिक निरीक्षण पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है,जिसके तहत जिला पुलिस कार्यालय, थानों के रिकॉर्ड,अपराधों की विवेचना,लंबित मामलों, कानून-व्यवस्था की स्थिति, शस्त्रागार,मालखाना,मानव संसाधन प्रबंधन तथा पुलिसिंग की कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। निरीक्षण के दौरान कमियों को चिन्हित कर आवश्यक सुधार संबंधी निर्देश भी दिए जाते हैं ताकि पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सके।उन्होंने कहा कि रतलाम रेंज के तीनों जिलों—नीमच, मंदसौर और रतलाम—में नशा मुक्ति अभियान प्राथमिकता के साथ चलाया जा रहा है। इस वर्ष अब तक तीन अवैध ड्रग फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया जा चुका है। हाल ही में मंदसौर जिले में 20 किलो ब्राउन शुगर की बड़ी खेप पकड़ी गई,जिसके तार पश्चिम बंगाल तक जुड़े पाए गए।जांच में सामने आया कि आरोपी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की सप्लाई विभिन्न राज्यों में कर रहे थे।डीआईजी ने बताया कि शिकलाना क्षेत्र में पकड़ी गई अवैध फैक्ट्री और उसके मुख्य आरोपी इलियास खान के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया गया है। पुलिस अब केवल वाहकों या कोरियरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लायर और खरीदारों तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। अफीम डोडाचूरा के अवैध परिवहन और तस्करी पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा एनडीपीएस एक्ट के तहत नियमित कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने कहा कि तीनों जिलों में बड़ी संख्या में वांछित अपराधी फरार हैं, जिन पर इनाम घोषित किया गया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार राजस्थान और हरियाणा सहित अन्य राज्यों में दबिश दे रही हैं। वहीं मादक पदार्थ तस्करी में दोषसिद्ध अपराधियों के विरुद्ध संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी की जा रही है। मंदसौर जिले में कई मामलों में सफेमा के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।अफीम और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में पुलिस पर लगने वाले आरोपों के संबंध में डीआईजी ने कहा कि प्रत्येक कार्रवाई की एसडीओपी और पुलिस अधीक्षक स्तर पर सतत मॉनिटरिंग की जाती है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अथवा अनियमितता सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाती है। पुलिस का प्रयास है कि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो,ताकि जनता का विश्वास बना रहे और नशा मुक्त समाज के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे प्रदेश में पुलिस बल का चरणबद्ध प्रशिक्षण चल रहा है। रतलाम रेंज के जिलों में भी लगभग 5 प्रतिशत बल को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगामी समय में ड्यूटी आवंटन और यातायात प्रबंधन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना लागू की जाएगी।दो दिवसीय निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने स्पष्ट संकेत दिए कि अपराधियों, नशा तस्करों और फरार आरोपियों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा तथा पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित समीक्षा और निरीक्षण किए जाते रहेंगे।