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पुश्तैनी जमीन में हिस्सेदारी से वंचित करने का आरोप, परिजनों व पटवारियों के खिलाफ शिकायत, बिना सहमति पुश्तैनी भूमि बेचने का मामला, दिव्यांग किसान ने लगाई न्याय की गुहार.....

नीमच//जिले के ग्राम बोरखेड़ी कला निवासी जवादीश पिता भंवरलाल ब्राह्मण ने अपने ही परिजनों, भूमि खरीदारों एवं संबंधित पटवारियों पर मिलीभगत कर उनके हिस्से की पुश्तैनी कृषि भूमि बेचने और नामांतरण कराने का आरोप लगाते हुए प्रशासन को शिकायत सौंपकर न्याय की मांग की है।शिकायतकर्ता जवादीश ने दिए गए ज्ञापन में बताया कि ग्राम बोरखेड़ी कला स्थित सर्वे नंबर 20, 307, 44, 156 एवं 437 सहित अन्य भूमि में चार भाइयों और दो बहनों का बराबर हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 में उनके भाई गौतमलाल ने बिना किसी वैधानिक बंटवारे और उनकी सहमति के अपने पुत्र मुकेश पिता गौतमलाल को भूमि का हिस्सा विक्रय कर दिया। इसके बाद सर्वे नंबर 307 की भूमि भी गौतमलाल द्वारा अपने पिता मोजीराम निवासी बोरखेड़ी कला को बेच दी गई।ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2023 में सर्वे नंबर 44 रकबा 71 आरी भूमि को गौतमलाल, बद्रीलाल, गीताबाई, कृष्णाबाई, श्यामाबाई, अनिल एवं अशोक द्वारा आपसी मिलीभगत से विक्रय किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान परिवार में कोई विधिवत बंटवारा नहीं हुआ और न ही उन्हें कोई सूचना दी गई।जवादीश ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पटवारी रेखा गुप्ता ने बिना सूचना दिए नामांतरण कर दिया, जबकि बाद में संबंधित पटवारी सुमित शर्मा ने भी कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए रजिस्ट्री एवं नामांतरण की कार्रवाई कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा तहसील कार्यालय नीमच में आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने बताया कि बाद में उक्त भूमि समकांत बागड़ी पिता अशोक कुमार बागड़ी निवासी नीमच को विक्रय कर दी गई। शिकायतकर्ता ने अशोक बागड़ी पर धमकी देने का भी आरोप लगाया है। ज्ञापन में उल्लेख है कि उन्हें अपने हिस्से की भूमि पर आने-जाने से रोका जा रहा है।जवादीश ने बताया कि वह दिव्यांग हैं तथा उनका पुत्र भी दिव्यांग है। कृषि भूमि ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, विवादित नामांतरणों की जांच कराने तथा उनके हिस्से की भूमि पर कब्जा दिलाकर न्याय प्रदान करने की मांग की है।उपरोक्त सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए ज्ञापन में लगाए गए हैं। इन आरोपों की प्रशासनिक जांच एवं आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।

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